Wealth Chaser Global Research Share Market News शेयरों से कमाई भरपूर और खोने का खतरा दूर करने के 9 टिप्स !!

शेयरों से कमाई भरपूर और खोने का खतरा दूर करने के 9 टिप्स !!



हरेक निवेशक दलाल स्ट्रीट में चौके-छक्के जड़ते रहना चाहता है, सफलता इक्के-दुक्के के ही हाथ लगती है। किसी बिजनस में आंशिक हिस्सेदार की भूमिका में आने के लिए इक्विटी सबसे सहज जरिया है। इक्विटी इन्वेस्टमेंट से घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि में सीधी भागदारी मिलती है, जिससे खुद की भी संपत्ति में इजाफा होता है।

यूं तो सदियों से प्रमाणित हो रहा है कि इक्विटी दौलत कमाने का सर्वोत्तम तरीका है। लेकिन, इस हकीकत से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि इसमें भारी नुकसान भी उठाना पड़ता है। तो सवाल यह उठता है कि आखिर वो कौन से नुस्खे हैं जिनकी बदौलत equity market में चांदी काटी जा सकती है? मार्केट के दिग्गजों की मानें तो इन 9 आसान तरीकों से एक सामान्य investor शानदार निवेशक बन सकता है…

लगाातार निवेश का चमत्कार
आइंस्टाइन की प्रसिद्ध उक्ति है- निवेश बढ़ाते रहने की ताकत (पावर ऑफ कंपाउंडिंग) दुनिया का आठवां आश्चर्य है। किसी कामयाब equity investor की एक खासियत यह होती है कि वो निवेश पर मिले लाभ से भी शेयर ही खरीदते रहते हैं। उन्हें पता होता है कि एक अवधि के बाद उनका निवेश बढ़कर कई गुना हो जाएगा। हालांकि, यह सुनने में बहुत सामान्य लग रहा हो, लेकिन इसमें अनुशासन और अवधि का बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शुरू-शुरू में जब फायदा नहीं होता तो ज्यादातर निवेशक धैर्य खो देते हैं, लेकिन कामयाब निवेशक अक्सर जल्दबाजी नहीं दिखाते और लंबे समय तक बाजार में बने रहते हैं।

लेकिन, इसके ठीक उलट कर्ज लेकर इक्विटी में निवेश करना (लीवरेजिंग) दोनों तरफ से घातक हो सकता है। उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे मार्केट में निवेश पर बड़ा नुकसान तो हो ही सकता है, कर्ज का ब्याज भी बहुत बढ़ सकता है। एंट्रस्ट फैमिली ऑफिस investment advisor के डायरेक्टर एवं को-फाउंडर रमेश बुक्का बताते हैं, ‘सफल इक्विटि इन्वेस्टर लीवरेज का इस्तेमाल नहीं के बराबर करते हैं। वो अक्सर लाभांश या दूसरी आमदनी को इक्विटी में लगाते हैं।’

राइट हॉरिजन्स फाइनैंशल सर्विसेज के सीईओ अनिल रेगो ने कहा, ‘एक कोर पोर्टफोलियो होना महत्वपूर्ण है जिसे लोगों को तब तक नहीं बेचना चाहिए जब तक कि घर जैसी अहम जरूरतों के लिए पैसे निकालने की जरूरत नहीं पड़े। अच्छी कंपनियां जीडीपी वृद्धि की दर से करीब-करीब दोगुना बढ़ती हैं। इस तरह, लगातार वृद्धि से समय के साथ-साथ निवेश में बड़ा इजाफा होगा। सर्वोत्तम शेयरों से कमाई का मूल मंत्र धैर्य है। टिके रहने की क्षमता नियत आय निवेशों में भी कारगर साबित होती है।’

अफवाहों पर ध्यान न दें
1990 के दशक के मशहूर इन्वेस्टर जोसफ केनडी के जूते चमकाने वाला लड़का ही उन्हें निवेश के लिए शेयरों का सुझाव देने लगा तो उन्होंने इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स से निकलने का फैसला कर लिया। जब स्टॉक मार्केट शानदार तेजी हासिल कर लेता है और सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने लगता है तो काफी शोर-शराबा मचने लगता है। उस वक्त अनुभवहीन लोग शेयर खरीदते या बेचते हैं और निवेश का कोई अनुभव नहीं होने के बावजूद दूसरों के आगे डींग हांकते हैं। यह तरीका जुआ खेलने का होता है, न कि निवेश का। जुआरी सामान्यतः बहुत पैसे गंवाता है और कभी-कभार जीत जाने की वजह से जुआ खेलता रहता है।

कंपनी में निवेश करने से पहले उसे जान लें 
कई बार लोग बिजनस को समझे बिना शेयर खरीद लेते हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में लिस्टेड 5000 से ज्यादा शेयरों में कुछ बेहतरीन का चुनाव कर पाना कठिन काम है। कोई शेयर खरीदने से पहले कुछ बिंदुओं पर विचार करना जरूरी है। जिस तरह हम कमाई के लिए कॉलेज में पढ़ते हैं और प्रफेशनल कोर्स करते हैं, उसी तरह अपने आसपास के बिजनस पर नजरें बनए रहें तो इक्विटी इन्वेस्टमेंट से शानदार कमाई हो सकती है।

कंपनी की वित्तीय सेहत का पता लगाएं 
कंपनियों की वित्तीय सेहत का पता लगाने के लिए स्टॉक मार्केट से क्वॉलिटी स्टॉक चुनने में मदद मिलती है। नामी निवेशक वॉरन बफेट ने निवेश के अपने दो महत्वपूर्ण पैमानों के बारे में बताया- रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड (आरओसीई) और प्राइस-अर्निंग्स (पी/ई) रेशियो। आरओसीई किसी कंपनी के मुनाफे के प्रतिशत का सूचकांक होता है।

स्वाभावित तौर पर जिस कंपनी का आरओसीई जितना ज्यादा है, निवेश करने के लिहाज से वह उतना ही बढ़िया है। बैंक की ब्याज दर से नीचे के आरओसीई वाली कंपनियों में निवेश से बचना चाहिए। पी/ई रेशियो से पे बैक पीरियड का पता चलता है। आसान शब्दों में कहें तो कंपनियां कितने सालों में निवेशक को उसकी पूंजी पर निरंतर लाभ देना शुरू कर देती हैं, वह पी/ई कहलाता है। यानी, कम-से-कम पी/ई वाली कंपनियों में निवेश के लिहाज से बेहतर माना जाता है। हालांकि, अगर कोई कंपनी तेजी से बढ़ रही है तो पी/ई ज्यादा हो तो भी निवेश किया जा सकता है, बशर्ते अन्य पहलुओं पर कंपनी खरी उतरे।

निवेश का सही वक्त चुनें
हम किराना सामान और सब्जियां खरीदने में हड़बड़ी नहीं करते, बल्कि इनके सस्ते होने का इंतजार करते हैं और दाम गिरने पर स्टॉक कर लेते हैं। इक्विटीज के साथ भी यही नीति अपनानी चाहिए। 18वीं सदी में बैरन रॉथ्सचाइल्ड ने कहा था, ‘खरीदने का सही वक्त वही है जब सड़कें लहू से लाल हों।’ उन्होंने उस वक्त खरीदारी की जब नेपोलियन के खिलाफ युद्ध से पहले कोहराम मचा था।

राइट हॉरिजन्स financial services के रेगो ने कहा, ‘अपनी पसंद की कंपनियों की एक लिस्ट तैयार करें और थोड़ी-थोड़ी खरीदारी शुरू कर दें। जब कीमत घटे तो कुछ और शेयर खरीद लें और उस वक्त बेच दें जब आपके पड़ोसियों के साथ-साथ अन्य लोगों में उस शेयर की चर्चा हो। सबसे सस्ता खरीदकर सबसे महंगा बेचने का दावा तो कोई जादूगर या बिल्कुल झूठा व्यक्ति ही कर सकता है। बहुत अच्छा रिटर्न पाने के लिए सेंसेक्स पीई रेंज 14 से कम होने पर शेयर खरीदकर इसके 23 के आसपास या इससे ज्यादा होने पर बेचने से मिल सकता है।’

उथल-पुथल के दौर में धैर्य के साथ आगे बढ़ें
कामयाब निवेशक बेहद धैर्यवान होते हैं। वो अपनी भावनाओं को लक्ष्य पर हावी नहीं होने देते। वो मार्केट में मचे कोहराम का असर अपने निवेश पर नहीं होने देते। एंट्रस्ट फैमिली ऑफिस इन्वेस्टमेंट अडवाइजर्स के बुक्का ने कहा, ‘कामयाब निवेशकों को पता होता है कि स्टॉक मार्केट्स अर्निंग्स पर निर्भर होते हैं। इसलिए, मार्केट में कोहराम का वक्त उनके लिए अच्छी कंपनियों के शेयर कम कीमतों में खरीदने का सर्वोत्तम मौका प्रदान करता है।’ इक्विटी इन्वेस्टमेंट में थोड़ा धैर्य रखना ही पड़ता है। आइशर मोटर्स, एमआरएफ और अजंता फार्मा ने मार्केट में उथल-पुथल के वक्त भी मल्टिबैगर रिटर्न्स दिए थे।

छानबीन करें
अच्छे निवेशक हमेशा अपनी निवेश क्षमताओं से वाकिफ होते हैं। वो बुनियादी रिसर्च भी करते हैं, कंपनियों का विश्लेषण करते हैं, क्वॉलिटी पर ध्यान देते हैं और उन कंपनियों में निवेश करते हैं जिनके प्रॉडक्ट्स और जिनकी नीतियों को वो पसंद करते हैं। कुल मिलाकर उन्हें जो समझ में आ जाए, उनमें बड़े विश्वास के साथ निवेश करते हैं।

छोटे शेयरों के लालच में नहीं आएं
अच्छा निवेशक बनना है तो सामान्य से छोटे शेयरों के लालच में नहीं आएं। बुक्का बताते हैं, ‘कामयाब निवेशक यह जानते हैं कि छेटे शेयर में निवेश गंवाना ही पड़ता है। इनमें फायदे के मुकाबले नुकसान की आशंका बहुत ज्यादा होती है। उन्हें अच्छी तरह पता होता है कि जब कभी भी इन छोटे स्टॉक्स की धूम होती है, तब मार्केट बहुत जोखिमों से भरा होता है।’

बहुत घालमेल नहीं करें
निवेश में कामयाबी हासिल करनी है तो निवेश को बेहद पेचीदा नहीं बनाएं और अपने पोर्टफोलियो को साफ-सुथरा रखें। अपने पोर्टफोलियो में तरह-तरह के शेयरों को जगह दें और समझदारी के साथ निवेश करें। बुक्का ने कहा, ‘अच्छे निवेशक बार-बार अपनी रणनीति नहीं बदलते रहते। उनका ध्यान भविष्य पर होता है। वो जानते हैं कि लागत कम रखने और लाभांश को दुबारा निवेश कर देने से अच्छी कमाई की जा सकती है।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *